ज़रूरत ही नहीं अल्फाज़ की,
प्यार तो चीज़ है बस एहसास की,
पास होते तो मंज़र ही क्या होता,
दूर से ही ख़बर है हमे आपकी हर साँस की...
इकरार में शब्दों की एहमियत नही होती,
दिल के जज्बात की आवाज़ नही होती,
आँखें बयाँ कर देती हैं दिल की दास्ताँ,
मोहब्बत लफ्जों की मोहताज नही होती!
कितना भी चाहो न भूल पाओगे
कितना भी चाहो न भूल पाओगे
हम से जितना दूर जाओ नजदीक पाओगे
हमें मिटा सकते हो तो मिटा दो यादें मेरी, मगर ..
क्या सपनो से जुदा कर पाओगे हमें
यादों की परछाई में अब तो आए तेरा ही चेहरा
तू अभी तक इस बात से है अनजान कि मैं हूँ दीवाना तेरा
इजहार-ऐ-मोहबात करने तो बहुत बार सोचा मैंने
पर हर बार तेरे ही अक्स ने रोका है रास्ता मेरा
हर पल ने कहा एक पल से ...
पल भर के लिए आप मेरे सामने आ जाओ...
पल भर का साथ कुछ ऐसा हो ...
कि हर पल तुम ही याद आओ...
जब तन्हाई मे आपकी याद आती है,
होंठो पे एक ही फरियाद आती है ...
खुदा आपको हर खुशी दे ,
क्योंकि आज भी हमारी हर खुशी आपके बाद आती है..
जब खामोश आंखो से बात होती है
ऐसे ही मोहब्बत की सुरुवात होती है
तुम्हारे ही खयालो में खोये रहते हैं
पता नही कब दिन कब रात होती है
आपके आने से ज़िंदगी कितनी ख़ूबसूरत है,
दिल मे बसाई है जो वह आपकी ही सूरत है,
दूर जाना नहीं हमसे कभी भूलकर भी,
हमे हर कदम पर आपकी ज़रूरत है

लोड हो रहा है...