आज के युग मे शायद पैसा और नाम ही सब कुछ होता जा रहा है, कोई ये नहीं सोचता कि मेरी कम्पनी के विज्ञापन से समाज पर, आज की नौजवान पीडी पर क्या असर पड़ेगा, मैं यहाँ ऐसे ही ३ विज्ञापन का जिक्र करना चाहूंगा जिन्हें देखकर सोचने पर विवश हो जाता हूँ कि क्या यही भारतीय भविष्य है?
- नौकरी डॉट कॉम: इस विज्ञापन मे एक कर्मचारी को अपने बॉस की बेज्जती करते दिखाया गया है, शायद ये विज्ञापन सभी ने देखा होगा, हरी साडू... क्या दूसरी नौकरी मिलने पर हम अपने बॉस की बेज्जती करें? अपने से बडो की इज्ज़त करना ना सिखाएं पर कम से कम बेईज्ज़त करना तो ना शिखाएं, इस तरह के विज्ञापन भारतीय संस्कृति तथा ह्यूमन वेल्यू को नीचा ही दिखाएँगे.
- बी एस एन एल: ये वो विज्ञापन है जिसमे दिखाया गया है कि यदि आपके पास मोबाइल है तो खूब झूठ बोलो, आप कहीं पर भी हैं, पर अपने परिवार से, अपने बिजनेस एसोसिअट से झूठ बोलो, क्या ये विज्ञापन सच के बलबूते पर नहीं बनाया जा सकता था, क्या लोग सच को पसंद नहीं करते? पर लगता है सबने ठान रखा है कि हम अपनी आने वाली पीडी को झूठ बोलना सिखाएं, सिखाएं कि कभी किसी कि इज्ज़त मत करो... कटु सत्य...
- मोटो युवा: ये एक मोबाइल फ़ोन का विज्ञापन है, इसमे भी वही... संसकारों का जितना सत्यानाश दिखा सकते, दिखाया है, एक नौजवान जिसने अपने घर पर सारा सामान अस्त व्यस्त कर रखा है, उसके पिताजी उसको डांट रहे हैं, पर विज्ञापन मे दिखाया है कि वो लड़का फ़ोन पर गाने सुनाने लगता है एवं अपने पिताजी की बातें नज़र अंदाज कर रहा है, पिताजी को पता भी नहीं कि उनका बेटा उनकी बातें सुन भी रहा है कि नहीं, और बेटा मस्ती मे गाने सुन रहा है... पिताजी कि इज्ज़त की तो भाजी पाला... क्या यही विज्ञापन होना चाहिए...?
साथियो आप क्या सोचते हैं, क्या ऐसे विज्ञापन दिखाए जाने चाहिए, क्या ये हमारे संस्कारों को ग़लत दिशा मे धकेल रहे हैं? क्या आज की पीडी पर इन विज्ञापनो का ग़लत असर नहीं पड़ेगा? आपके विचारों का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा...

लोड हो रहा है...
प्रतिक्रियाएँ