Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

चुटकी मे दूर करें प्रॉब्लम

मानवर्धन कंठ


कामकाजी जिंदगी की जद्दोजहद से परेशान एक युवती ने अपनी मां से कहा कि ऑफिस में हर रोज उपस्थित होने वाली नई-नई समस्याओं से वह तंग आ चुकी है। उसने साफ शब्दों में बता दिया कि समस्याओं से जूझने की उसकी शक्ति अब खत्म हो चुकी है। इतना कुछ सुनने के बाद उसकी मां उसे लेकर किचन में चली गई और फिर एक छोटा-सा प्रयोग किया।

तीन अलग-अलग बर्तनों में लगभग आधा पानी भरा। पहले बर्तन में उन्होंने गाजर रखा, दूसरे में अंडे व तीसरे में चाय की पत्ती डाली। फिर कुछ देर तक उन्होंने बिना कुछ बोले सभी बर्तनों को गैस स्टोव पर उबाला। लगभग 20 मिनट बाद उन्होंने गैस बंद कर दी और अपनी बेटी से उन्होंने पूछा, तुम्हें क्या दिख रहा है? जवाब मिला - गाजर, अंडे और चाय..। मां ने उसे फिर कहा, जरा गौर से इन्हें देखो..। उसने ऐसा ही किया और पाया कि गाजर थोड़े मजबूत, मगर अंदर से मुलायम हो गए थे। जब उसने अंडे का निरीक्षण किया, तो वह अंदर हार्ड हो चुका था, मगर हल्के-से प्रयास से उसे तोड़ना संभव हो चुका था। अंत में उसने चाय वाले बर्तन को गौर से देखा, तो उसमें से एक खुशबू-सी निकल रही थी। अब उससे रहा न गया। उसने अपनी मां से पूछ ही दिया कि आप कहना क्या चाहती हैं? फिर मां ने बताया कि इनमें से हर एक चीज ने समान रूप से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया यानी कि एक ही तापमान पर सभी को उबाला गया, लेकिन सबने अलग-अलग तरह से रिएक्शन व्यक्त किए। अब मां ने बेटी से पूछा कि इनमें से तुम खुद को किस श्रेणी में रखती हो?

दरअसल, इंसानों के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। समान परिस्थिति से सभी गुजरते हैं, मगर हर व्यक्ति अपनी-अपनी क्षमता और समझ के हिसाब से अलग-अलग तरीके से रिएक्ट करता है। जब कोई समस्या आती है, तो आप किस प्रकार रिएक्ट करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। क्या आप गाजर की तरह हैं, जो बाहर से तो कड़ा दिखता है, पर थोड़ा उबालने के बाद बिल्कुल मुलायम हो जाता है? या फिर आप अंडे की तरह हैं, जिसका दिल तो पहले तरल अवस्था में होता है, मगर विपरीत परिस्थिति आते ही बिल्कुल जम जाता है। इतना ही नहीं, ऊपर की सख्त परत भी हल्की चोट से टूट जाती है। या कि आप उस चाय की पत्ती की तरह हैं, जो पानी की गुणवत्ता को ही बदल देती है, उसे खुशबू से भर देती है..। समस्याओं के बारे में एक बात कही जाती है कि जख्म को नासूर बनने से पहले उसका उचित इलाज जरूरी होता है। चूंकि अधिकांश समस्याएं मनुष्य द्वारा ही सृजित होती हैं, इसलिए उनका उपाय भी हमारे पास होता है। जब भी कोई समस्या खड़ी हो जाए, तो इसके मूल कारण का पता लगाना जरूरी हो जाता है। आजकल के प्रोफेशनल व‌र्ल्ड में प्रॉब्लम सॉल्विंग एटीट्यूड रखने वाले कैंडिडेट की बहुत डिमांड होती है।

आइए जानते हैं इस खास स्किल यानी कि प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल के बारे में..। यहां कुछ उपाय बताए जा रहे हैं, जिन्हें कॉरपोरेट जगत के महारथी अक्सर आजमाते हैं। प्रॉब्लम को फिक्स करें किसी भी समस्या का समाधान तलाशने से पहले उसे ठीक तरह से समझ लेना जरूरी है। इस पर भी विचार कर लें कि इसका नतीजा क्या हो सकता है? हर संभव विकल्पों के बारे में अच्छी तरह सोच लें और फिर उपलब्ध संसाधनों में उपयुक्त समाधान की ओर अग्रसर हो जाइए। समस्याओं की प्रकृति को पहचानिए आपको किसी भी समस्या का हल करने से पहले उसका ठीक-ठीक आकलन करना होगा। इस बात को समझना होगा कि आप किस प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं। क्या गड़बड़ हो रहा है? क्यों ऐसा हो रहा है? आखिर इसका अंत क्या होगा? इन प्रश्नों के सहारे आप समस्या का सही-सही निर्धारण कर सकते हैं। समस्याओं के निर्धारण के बाद उसका वर्गीकरण भी करना जरूरी है। कहीं यह कंपनी की पॉलिसी के खिलाफ तो नहीं? समस्या के शॉर्ट व लॉन्ग टर्म प्रभाव क्या हो सकते हैं? क्या तत्काल समाधान जरूरी है या फिर बाद में भी इसका हल तलाशा जा सकता है? समस्याओं से संबंधित सभी आयामों पर विचार-विमर्श और तथ्यों व प्रभावों को सूचीबद्ध करना भी जरूरी है। आपको इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि अब क्या हो सकता है..। समस्या के समाधान से संबंधित विकल्पों की ओर जितनी जल्दी हो सके, आगे कदम बढ़ा देना चाहिए। इसके बजाय कि आप यह सोचते रहें कि अगर ऐसा होता, तो.... आपको यह सोचना चाहिए कि अब क्या किया जाए ..। ब्रेनस्टॉर्म समस्याओं के सभी पहलुओं को सामने रखते हुए खुले दिमाग से उन पर चर्चा होनी चाहिए। अलग-अलग सुझावों पर गौर करना चाहिए। समस्या को समूल नष्ट करने की दिशा में साहसपूर्ण कदम उठाना चाहिए। कंपनी के हित में निर्णय लेने के लिए व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठ कर सोचना चाहिए। सबसे उत्तम समाधान वही होता है, जिससे सभी पक्ष खुश हो जाएं।

समस्याओं के संदर्भ में यह बात महत्वपूर्ण है कि कोई भी विपरीत परिस्थिति उत्पन्न होने से पहले ही उसका उपाय तलाश लेना चाहिए। यह भी जानना जरूरी है कि जो समस्या सामने हो, उसी के समाधान का प्रयास करना चाहिए। अगर समाधान की राह में किसी की मदद की आवश्यकता हो, तो खुलकर उससे सहायता लें। हां, काम हो जाने के बाद ऐसे लोगों का धन्यवाद करना न भूलें। न कहना सीखिए अगर आप यह जानते हैं कि मौजूदा हालात व उपलब्ध संसाधनों में समस्या का हल निकाल पाना असंभव है, तो फिर न कहने से मत हिचकिए। बात आगे बढ़ जाने और समस्या के विकराल रूप ले लेने से पहले ही शुरू में अगर आप अपनी बात स्पष्ट कर देते हैं, तो इससे बेहतर और कुछ नहीं होता है। कई बार हम लोग अपने ऊपर बेवजह समस्याओं को सिर्फ इसलिए ले लेते हैं, क्योंकि सही समय पर न कहना नहीं जानते। जिंदगी है, तो समस्याएं तो आएंगी ही।

प्रतिक्रियाएँ

Re: चुटकी मे दूर करें प्रॉब्लम
यह अद्भुत है भाई। विचारणीय, अनुकरणीय औऱ प्रेरणास्पद।
अस्वीकरण