जीवन भागने का नाम नहीं है। अगर आपको अपने को बदलना है, तो अपनी जगह को नहीं बदलें। जगह को बदलने का कोई मतलब नहीं है। जगह को बदलने में धोखा है, क्योंकि जगह को बदलने से आपको यह धोखा हो सकता है कि आप शांत हो गए हैं। जो शांति प्रतिकूल परिस्थितियों में न टिके, वह कोई शांति नहीं है।
इसीलिए जो समझदार हैं, वे प्रतिकूल परिस्थितियों में ही शांति को साधते हैं क्योंकि जो प्रतिकूल में साध लेते हैं, अनुकूल में तो उसे हमेशा उपलब्ध कर ही लेते हैं। इसलिए जीवन को परीक्षा समझो और इसे स्मरण में रखो कि आपके आसपास जो लोग हैं, वे सब सहयोगी हैं। वह आदमी भी आपका सहयोगी है, जो सुबह आपको गाली दे जाए। उसने एक मौका दिया है आपको। चाहें तो अपने भीतर प्रेम को साध सकते हैं।
वह आदमी भी आपका सहयोगी है, जो आपकी निंदा कर जाए। वह आदमी भी आपका सहयोगी है, जो आप पर कीचड़ उछालता हो, या जो आपके रास्ते पर कांटे बिछा दे, क्योंकि वह भी एक परीक्षा है। आप चाहें, तो उससे पार हो जाएं। साधु जो नहीं सिखा सकते हैं, इस जगत में शत्रु सिखा सकते हैं। इसलिए अपने शत्रु को भी मित्र समझने की कोशिश करें। अगर आप सजग हैं और आपमें सीखने की समझ है, तो आप जिंदगी के हर पत्थर को सीढ़ी बना सकते हैं। और नहीं तो नासमझ, सीढि़यों को भी पत्थर समझ लेते हैं और उनसे रुक जाते हैं।
आपको अपने घर में, परिवार में जो-जो बातें पत्थर मालूम होती हों कि इनकी वजह से मैं शांत नहीं हो पाता, उन्हीं को साधना का केंद्र बनाएं और देखें कि वे ही आपको शांत होने में सहयोगी हो जाएगी। अगर विचार करेंगे और विवेक करेंगे तभी रास्ता दिखाई पड़ेगा। यही जीवन का सार है।

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