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17 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (3)
जो भी देखे दांतो तले उंगली दबाने पर मज़बूर हो जाये, अद्भुत कला... आगे पढ़ें...

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको क्या हुआ आज, यह किस बात पे रोना आया किस लिए जीते हैं हम किसके लिए जीते हैं बारहा ऐसे सवालात पे रोना आयाकौन रोता है किसी और की खातिर ए दोस्त! सबको अपनी ... आगे पढ़ें...

धोबी की कोशिशों के बावजूद मूर्ख गधे ने उगला अपना राज। आगे पढ़ें...