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एहसास जिंदगी का


एहसास जिंदगी का
कम हो गया है मानो
जिंदा तो सब हैं लेकिन
जिंदादिली कहाँ है ?

सबको फिकर है सिर्फ अपनी
सब खुद मे ही जी रहे हैं
अपने ही अपनो से हो रहे परेशान हैं
एहसास जिंदगी का
कम हो गया है मानो...

पहले हुआ करती थी
जिन रिश्तों की डोरे मोटी
वही रिश्ते अब बस
एक नाम रह गये हैं
रिश्तों को मानो जैसे
एक ग्रहण लग गया है

एहसास जिंदगी का....


अस्वीकरण