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20 अक्टूबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
मुंशी प्रेमचंद की कहानी निष्ठुरता और प्रेम सुवामा तन-मन से विवाह की तैयारियां करने लगीं। भोर से संध्या तक विवाह के ही धन्धों में उलझी रहती। सुशीला चेरी की भांति उसकी आज्ञा का पालन किया करती। मुंशी संजीवनलाल प्रात:काल से सांझ तक हाट की धूल छानते रहते। और ... आगे पढ़ें...