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29 नवंबर, 2008


ब्लॉग्स (3)
अब तो करलो बुद्धि मित्र ठिकाने परमुंबई भी रक्खी हैं आज निशाने परसौ-सौ लोगों को खोकर भी खामोशीकब टूटेगी सिंघासन की बेहोशीअंधे लालच का सिन्धु भरके चित मेंध्रतराष्ट्र हैं मौन स्वयं-सूत के हित मेंवरना वो खुनी पंजे तुड़वा देतेअब तक अफजल पे कुत्ते छुड़वा देतेजो ... आगे पढ़ें...

संता (बंता से) : जापान जाने की सोच रहा हूं कितना पैसा लगेगा?बंता : बिल्कुल भी नहीं क्योंकि सोचने का कोई पैसा थोड़े ही लगता है। संता: मैडम, एक बात बताइए। क्या, किसी व्यक्ति को उस बात की सजा मिलनी चाहिए, जो उसने की ही न हो?टीचर : कदापि नहीं।संता : तो फिर ठीक ... आगे पढ़ें...

तेनाली राम की पत्नी को गुलाब के फूलों का बहुत शौक था। वह तेनाली राम से चुराकर अपने बेटे को राजा के बाग में भेजा करती। वह वहां से एक गुलाब का फूल तोड़ लाता, जिसे तेनाली राम की पत्नी अपने बालों में लगा लिया करती। दरबार में तेनाली राम के कई शत्रु थे। उन्हें ... आगे पढ़ें...